बैजनाथ मंदिर में योग की अलख! योग दिवस पर गरुड़ में ऐतिहासिक शिविर, अधिकारी और जनप्रतिनिधि हुए शामिल






आज 21 जून, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बैजनाथ मंदिर प्रांगण एक बार फिर अध्यात्म, स्वास्थ्य और अनुशासन के अद्भुत संगम का साक्षी बना। आयुष विभाग द्वारा आयोजित इस योग शिविर ने न केवल गरुड़ क्षेत्र बल्कि पूरे बागेश्वर जिले में एक सकारात्मक संदेश फैलाया। शिविर में नगर पंचायत अध्यक्ष भावना वर्मा ने अध्यक्षता की, वहीं उपजिला अधिकारी गरुड़ प्रियंका रानी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। इस अवसर पर तहसील प्रशासन से प्राची बहुगुणा, खंड विकास अधिकारी, एनसीसी अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग की अधिकारी और कर्मचारी, समस्त सभासद, निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य, बैजनाथ थाने के प्रभारी प्रताप नगरकोटी, ग्राम पंचायत अधिकारी, शिक्षक और राजस्व विभाग के तमाम अधिकारी मौजूद रहे।
शिविर में जहां प्रतिभागियों ने सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और ध्यान जैसी क्रियाओं को अपनाया, वहीं कार्यक्रम का उद्देश्य सिर्फ योगाभ्यास ही नहीं, बल्कि योग दर्शन की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्ता को जन-जन तक पहुंचाना भी रहा। उपजिलाधिकारी प्रियंका रानी ने योग को केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि ऋषि-मुनियों की अमूल्य देन बताते हुए कहा कि योग आत्मा, शरीर और मन को संतुलन में रखने का विज्ञान है। उन्होंने कहा कि योग के माध्यम से हम न केवल मानसिक शांति प्राप्त करते हैं बल्कि हमारे सामाजिक और पारिवारिक जीवन में भी संतुलन आता है।
नगर पंचायत अध्यक्ष भावना वर्मा ने योग को जीवन में विज्ञान की तरह उपयोगी बताते हुए कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, यह चेतना से जुड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि यदि मन स्वस्थ है तो शरीर स्वयं स्वस्थ हो जाएगा। उन्होंने उपस्थित योग प्रशिक्षकों का विशेष रूप से धन्यवाद करते हुए कहा कि ऐसे शिविरों से नई पीढ़ी योग की ओर आकर्षित होती है, जो समाज के लिए एक शुभ संकेत है।
इस कार्यक्रम में राज्य दर्जा प्राप्त मंत्री शिव सिंह बिष्ट को भी पहुंचना था, लेकिन किसी कारणवश वे उपस्थित नहीं हो पाए। हालांकि, उनकी शुभकामनाएं आयोजकों और प्रतिभागियों तक पहुंचाई गईं।
शिविर के अंत में मंदिर परिसर पर सामूहिक ध्यान और मौन साधना की गई, जहाँ सभी उपस्थित जनों ने योग के माध्यम से शांति, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा को अनुभव किया।
इस पूरे आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि योग केवल शरीर को लचीला बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन को सुंदर, सार्थक और स्वस्थ बनाने का संपूर्ण विज्ञान है। बैजनाथ मंदिर में आयोजित यह योग शिविर आने वाली पीढ़ियों को भी योग की महत्ता का मार्ग दिखाता रहेगा।
इस ऐतिहासिक दिन ने फिर एक बार सिद्ध कर दिया कि उत्तराखण्ड की भूमि न केवल देवभूमि है, बल्कि यह योग की भी जन्मभूमि है।





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