बागेश्वर से एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है, जहाँ जनपद को टीबी यानी क्षय रोग से पूरी तरह मुक्त बनाने की दिशा में प्रशासन ने तेज़ कदम बढ़ा दिए हैं। जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक की, जिसमें जनपद को टीबी मुक्त बनाने के लिए तैयार कार्ययोजना पर गंभीरता से चर्चा की गई।
बैठक में जिलाधिकारी ने साफ निर्देश दिए कि टीबी मुक्त बागेश्वर का सपना तभी साकार होगा, जब इसे जमीनी स्तर से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत ग्राम पंचायतों से होनी चाहिए, जो सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई होती है। हर पंचायत को टीबी मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं और इसे ब्लॉक स्तर पर चरणबद्ध तरीके से मॉडल के रूप में अपनाया जाए।
जिलाधिकारी भटगांई ने इस दौरान टीबी उन्मूलन में सामाजिक सहभागिता को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने जोर दिया कि ग्राम पंचायत स्तर पर लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए और अन्य विभागों के सहयोग से इसे व्यापक रूप दिया जाए। उन्होंने निर्देशित किया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में नियमित शिविर लगाकर लोगों की निःशुल्क जांच करवाई जाए ताकि रोग की समय रहते पहचान हो और उपचार में कोई देरी न हो।
बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी कुमार आदित्य तिवारी ने बताया कि अब तक जनपद में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष 2023 में 76 और 2024 में 151 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। वर्ष 2025 में भी इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सभी संभावित रोगियों की पहचान के लिए शिविरों में एक्सरे सहित तमाम जांचें निःशुल्क की जाएंगी।
डॉ. तिवारी ने यह भी जानकारी दी कि जनपद में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत हर स्वास्थ्य केंद्र पर टीबी की जांच और उपचार मुफ्त में उपलब्ध हैं। साथ ही उपचार के दौरान मरीजों को पोषण सहायता भी दी जाती है, ताकि उनका शरीर रोग से लड़ने के लिए सक्षम बना रहे।
बैठक में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. दीपक कुमार, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. देवी प्रसाद शुक्ला और जिला कार्यक्रम समन्वयक अमित तिवारी समेत कई स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर यह संकल्प दोहराया कि बागेश्वर को जल्द से जल्द टीबी मुक्त जनपद बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की यह पहल न सिर्फ जनपद के नागरिकों को एक स्वस्थ जीवन की ओर ले जाएगी, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए एक प्रेरणास्पद उदाहरण भी बनेगी। टीबी जैसे गंभीर रोग के खिलाफ इस सामूहिक अभियान से यह संदेश साफ है – जब शासन, प्रशासन और जनता साथ चलें, तो किसी भी चुनौती को हरायाजा सकता है।





Users Today : 1
Users Yesterday : 14
Users Last 7 days : 788