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“धराली के बाद अब थराली में आपदा की आफत, रातभर मची तबाही”

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रिपोर्ट भगवत नेगी मेरा हक न्यूज़

उत्तरकाशी के धराली के बाद  एक बेहद दुखद और दर्दनाक खबर सामने आई है। चमोली जिले के थराली क्षेत्र में बादल फटने और भूस्खलन की भीषण आपदा ने कई परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। कल देर रात अचानक आई इस आपदा ने पूरे इलाके में तबाही मचा दी। थराली, केदारबगड़, राड़ीबगड़ और चेपणों जैसे क्षेत्रों में मकानों को भारी क्षति पहुँची है, कई वाहन मलबे में दब गए हैं और सबसे दुखद बात यह है कि जनहानि की भी सूचना सामने आई है। हालांकि अभी प्रशासन पूरी तरह से नुकसान का आंकलन नहीं कर पाया है, लेकिन तस्वीरें और घटनास्थल से मिल रही जानकारियाँ इस आपदा की भयावहता को साफ दिखा रही हैं।

नगर पंचायत अध्यक्ष सुनीता रावत के मकान में भी मालवा घुसा

बताया जा रहा है कि थराली तहसील अंतर्गत टूनरी गदेरा क्षेत्र में बादल फटने की मुख्य घटना हुई। देखते ही देखते तेज बारिश के साथ पहाड़ों से आया मलबा बाजार और घरों में घुस गया। तहसील परिसर में काफी मात्रा में मलबा जमा हो गया और कई गाड़ियाँ उसके नीचे दब गईं। इस दौरान थराली के सागवाड़ा गांव से बेहद दर्दनाक खबर आई है। यहां एक 20 वर्षीय युवती के घर में मलबा घुस गया और वह दब गई। इसी गांव में एक और व्यक्ति के मलबे में दबे होने की सूचना प्रशासन तक पहुँची है। चेपणों बाजार में भी कई दुकानों को नुकसान पहुँचा है और एक व्यक्ति के लापता होने की खबर सामने आई है।

 

सड़क संपर्क भी पूरी तरह बाधित हो गया है। थराली-ग्वालदम मार्ग मिंग्गदेरा में बंद हो गया है, वहीं थराली-सागवाड़ा मार्ग भी पूरी तरह से अवरुद्ध है। इससे राहत और बचाव कार्यों में भारी कठिनाई आ रही है। स्थानीय लोग फिलहाल खुद ही मलबा हटाने और फंसे हुए लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

 

जैसे ही सूचना जिला आपदा कंट्रोल रूम चमोली तक पहुँची, तत्काल SDRF की टीम गौचर से घटनास्थल के लिए रवाना हो गई है। प्रशासन ने कहा है कि राहत-बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। लेकिन रात के अंधेरे और लगातार हो रही बारिश के चलते बचाव कार्य में रुकावटें आ रही हैं।

 

स्थानीय लोग इस आपदा को मां नन्दा राजराजेश्वरी के आगमन से भी जोड़कर देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि कल शाम ही देवी का सूना ग्राम सभा में आगमन हुआ था और रात को ही यह विकराल आपदा आ गई। आस्था और विश्वास से जुड़े लोग इसे देवी का संदेश मान रहे हैं और हर किसी की जुबां पर यही प्रार्थना है कि मां सभी की रक्षा करें और इस आपदा से सभी सुरक्षित निकल पाएं।

 

फिलहाल प्रशासन नुकसान का विस्तृत आंकलन कर रहा है, लेकिन यह साफ है कि तबाही बहुत भयंकर है। घर टूट गए, दुकानें उजड़ गईं, सड़कें बंद हो गईं और सबसे बड़ा दुख यह है कि कुछ मासूम जिंदगियां भी मलबे में दब गईं। उत्तराखंड की यह त्रासदी हर किसी के दिल को झकझोर रही है।

 

मेरा हक न्यूज़ की ओर से हम यही प्रार्थना करते हैं कि प्रभावित परिवारों को इस संकट की घड़ी में संबल मिले और प्रशासन जल्द से जल्द राहत और मदद पहुंचाए। यह आपदा हमें एक बार फिर याद दिलाती है कि हमारे पर्वतीय इलाकों की नाजुक भौगोलिक स्थिति हमें हमेशा सचेत रहने का संदेश देती है।

 

 

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