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जर्मनी ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को मजबूत समर्थन की पुष्टि की

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आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस की नीति का संदेश लेकर भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद के नेतृत्व में संसदीय प्रतिनिधिनंडल जर्मनी पहुंचा। जहां भारतीय सांसदों ने आतंक के मुद्दे पर एकजुटता की अपील करते हुए आतंकवाद को लेकर कड़ा संदेश दिया। जहां जर्मनी ने भारत को इस संघर्ष में अपना पूर्ण समर्थन और एकजुटता दोहराई। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने साफ कहा कि भारत किसी भी प्रकार के परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर अडिग है।

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प्रतिनिधिमंडल ने जर्मनी के विदेश मामलों के मंत्री जोहान वेडफुल, जर्मन संसद (बुंडेसटैग) के शीर्ष नेताओं और थिंक टैंक्स से मुलाकात की। इन सभी जर्मन नेताओं ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खड़े होने की बात कही।

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जर्मनी के विदेश मंत्री का बयान

जर्मनी के संघीय विदेश मंत्री जोहान वेडफुल ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर भारत को आतंकवाद के खिलाफ मजबूत समर्थन और एकजुटता दोहराई। उन्होंने पहलगाम हमले की कड़ी निंदा भी की। देखा जाए तो भारत के इस स्पष्ट और सिद्धांत-आधारित रुख को जर्मनी के राजनीतिक नेतृत्व, सांसदों और थिंक टैंक्स का विस्तृत समर्थन मिला। दोनों देशों ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने और रणनीतिक साझेदारी को और गहराने पर चर्चा की।

भारतीय दूतावास ने दी जानकारी

मामले में भारतीय दूतावास के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को और गहराने, वैश्विक शांति और सुरक्षा में साझा भूमिका, और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा की।जहां प्रतिनिधिमंडल ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद और उसे समर्थन देने वालों के बीच कोई फर्क नहीं करता।

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आतंक के खिलाफल एकजुट रहने की प्रतिज्ञा

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया, जिसके तहत भारत ने आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल हमले किए थे। साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने बर्लिन में भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की, जिन्होंने हमले में मारे गए लोगों की याद में दो मिनट का मौन रखा और आतंक के खिलाफ एकजुट रहने की प्रतिज्ञा ली। प्रतिनिधिमंडल में कई प्रमुख दलों के सांसद शामिल थे, जिनमें दग्गुबाती पुरंदेश्वरी, प्रियंका चतुर्वेदी, एमजे अकबर और पंकज सरन जैसे पूर्व मंत्री और राजनयिक शामिल थे।

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