Home » उत्तराखंड » बागेश्वर न्यूज़ » बैजनाथ मंदिर में गूंजेगा हरेला का उत्सव, प्रकृति और संस्कृति का अनोखा संगम

बैजनाथ मंदिर में गूंजेगा हरेला का उत्सव, प्रकृति और संस्कृति का अनोखा संगम

Spread the love

रिपोर्ट – भगवत नेगी, मेरा हक न्यूज गरुड़

उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और प्रकृति प्रेम को समर्पित पर्व हरेला एवं नदी उत्सव का भव्य आयोजन इस बार ऐतिहासिक बैजनाथ मंदिर परिसर में होने जा रहा है। इस आयोजन में परंपरा, पर्यावरण और लोकमानस का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा, जो न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का माध्यम भी बनेगा।

 

यह समारोह 16 जुलाई 2025, बुधवार को सुबह 9 बजे से शुरू होगा, जिसमें जनपद बागेश्वर और राज्य स्तर के अनेक विशिष्ट जन सहभागिता करेंगे। इस पूरे कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई करेंगे, जो प्रशासनिक सूझबूझ और सामाजिक सरोकारों के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं।

 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे शिव सिंह बिष्ट, जो वर्तमान में राज्य स्तरीय अनुश्रवण परिषद, उत्तराखंड सरकार के पीएसजीएसवाई के माननीय उपाध्यक्ष हैं। पर्यावरणीय योजनाओं और लोकहित से जुड़े कार्यों में इनकी गहरी रूचि और सक्रियता इस आयोजन को विशेष महत्व प्रदान करती है।

 

इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में अति विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक पार्वती दास उपस्थित रहेंगी, जो विधानसभा क्षेत्र बागेश्वर का प्रतिनिधित्व करते हुए विकास और संस्कृति के प्रति प्रतिबद्ध रही हैं। वहीं नगर पंचायत गरुड़ की अध्यक्ष भावना वर्मा भी विशिष्ट अतिथि के रूप में इस उत्सव की शोभा बढ़ाएंगी।

 

यह आयोजन केवल एक परंपरा को निभाने का मौका नहीं है, बल्कि एक संदेश है – कि जब तक हमारी नदियाँ जीवित हैं, जब तक हमारी मिट्टी उपजाऊ है, तब तक ही जीवन संभव है। हरेला, जो हरियाली और कृषि से जुड़ा पर्व है, उसके साथ नदी उत्सव का जुड़ना यह दर्शाता है कि प्रकृति के हर पहलू का संरक्षण एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है।

 

इस खास कार्यक्रम का आयोजन प्रभागीय वनाधिकारी, वन प्रभाग बागेश्वर की अगुवाई में किया जा रहा है। वन विभाग द्वारा इस आयोजन को न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से, बल्कि पर्यावरणीय जागरूकता के रूप में भी देखा जा रहा है। बैजनाथ जैसे पवित्र स्थल पर हरेला और नदी उत्सव का आयोजन, हमारे धार्मिक और पर्यावरणीय मूल्यों के समन्वय का प्रतीक है।

 

इस मौके पर पौधारोपण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, नदी संरक्षण पर जागरूकता कार्यक्रम और विभिन्न सामाजिक गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी, जो आमजन को पर्यावरण से जुड़ने और संरक्षण का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करेंगी।

 

तो आइए, 16 जुलाई को बैजनाथ मंदिर परिसर में इस लोकपर्व का हिस्सा बनें, प्रकृति को नमन करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित संदेश छोड़ें।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Mera Hak News हिंदी के साथ रहें अपडेट

सब्स्क्राइब कीजिए हमारा डेली न्यूजलेटर और पाइए खबरें आपके इनबॉक्स में

और खबरें

Our Visitor

0 3 3 5 2 5
Users Today : 8
Users Yesterday : 10
Users Last 7 days : 247

Rashifal