रिपोर्ट, भगवत नेगी, मेरा हक न्यूज़
आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसी महिला की, जिसने अपने समर्पण और निस्वार्थ सेवा से न सिर्फ बच्चों का बचपन संवारा बल्कि ग्रामीण समाज में स्वास्थ्य और शिक्षा की नई राह भी दिखाई। उत्तराखंड के बागेश्वर जिला के गरुड़ क्षेत्र के पिंगलों की आंगनबाड़ी कार्यकत्री मुन्नी रावत को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए तिलु रेतोली पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है।
मुन्नी रावत वर्ष 2011 से लगातार कार्यरत हैं। उन्होंने नन्हे-मुन्ने बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया और उन्हें शिक्षा से जोड़ने के लिए भी अथक प्रयास किए। सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार और कुपोषण से बचाव के लिए भी उन्होंने उल्लेखनीय काम किया। उन्होंने सरकार की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाकर हर परिवार को लाभान्वित किया और आंगनबाड़ी को सच में सेवा का केंद्र बना दिया।
कोरोना काल में भी मुन्नी रावत ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को गति दी। महिलाओं को बाल विकास की योजनाओं से जोड़कर उनके जीवन को बेहतर बनाने का कार्य किया। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य केवल बच्चों का उज्ज्वल भविष्य ही नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य को भी सुधारना है।
हर दिन केंद्र में उपस्थित होकर मुन्नी रावत न केवल बच्चों की देखभाल करती हैं, बल्कि गांव-गांव जाकर महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देती हैं और पौष्टिक आहार का महत्व समझाती हैं। उनकी लगन और मेहनत का ही परिणाम है कि आज उन्हें इस पुरस्कार के लिए चुना गया है। उनके चयन की खबर से गांव में खुशी का माहौल है और लोग उन्हें गर्व से अपनी प्रेरणा मान रहे हैं।
यह कहानी साबित करती है कि यदि दृढ़ निश्चय और सेवा भाव हो तो कोई भी अपने क्षेत्र में परिवर्तन ला सकता है। मुन्नी रावत ने यह दिखा दिया कि समर्पित महिला न केवल बच्चों का भविष्य संवारेगी, बल्कि पूरे समाज के स्वास्थ्य और शिक्षा की तस्वीर बदल सकती है।





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