बागेश्वर की खाई में 6 दिन से फंसा था नेपाली युवक, पुलिस बनी फरिश्ता, जान बचाने के लिए बहा दिया पसीना!
ये घटना किसी चमत्कार से कम नहीं है। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के दुर्गम जंगलों में एक युवक छह दिन तक फंसा रहा… बिना खाना, बिना मदद, लेकिन ज़िंदगी की उम्मीद नहीं छोड़ी। और फिर, जिस उम्मीद की वो राह देख रहा था, वो उम्मीद बनी बागेश्वर पुलिस की रेस्क्यू टीम।
20 जून 2025 की शाम को नामिक गांव के कुछ स्थानीय लोगों ने थाना कपकोट पुलिस को जानकारी दी कि गोगिना से करीब तीन-चार किलोमीटर दूर, जंगल में रामगंगा पुल के पास एक व्यक्ति फंसा हुआ है। ये इलाका इतना दुर्गम था कि वहां तक वाहन से सिर्फ एक सीमा तक ही पहुंचा जा सकता था। ऊपर से रात्रि का समय, मूसलाधार बारिश और मोबाइल नेटवर्क भी बंद। लेकिन इन मुश्किलों के बावजूद, पुलिस, एसडीआरएफ और फायर विभाग की संयुक्त टीम बिना एक पल गंवाए निकल पड़ी उस अनजान और खतरनाक रास्ते की ओर।
गोगिना से करीब 3 किलोमीटर पैदल चलने के बाद जंगल में टीम को नामिक गांव के हीरा बाबा और दो अन्य स्थानीय लोग मिले, जिन्होंने रास्ता दिखाकर टीम को रामगंगा पुल के पास ले जाया। टॉर्च की रोशनी में नदी के पार एक व्यक्ति बैठा नजर आया, जो लगातार मदद के लिए आवाज़ लगा रहा था।
नदी का बहाव बहुत तेज था, लेकिन पुलिस टीम ने जान की परवाह किए बिना रोप की मदद से उफनती नदी को पार किया। दूसरी तरफ घायल अवस्था में बैठा युवक था 24 वर्षीय जितेन्द्र दास, जो नेपाल के हरिपुर गांव का रहने वाला है। उसने बताया कि वह 6 दिन पहले ऊपर से फिसल कर नीचे गिर गया था और तब से वहीं फंसा हुआ था।
टीम ने सबसे पहले उसे खाना दिया और फिर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। तेज बहाव वाली नदी, जंगल की फिसलनभरी पगडंडियाँ और ऊपर से भारी बारिश, लेकिन पुलिस की हिम्मत नहीं टूटी। रोप टेक्नीक के ज़रिए नदी पार की गई, चीयर हार्नेस बनाकर युवक को सुरक्षित बाहर लाया गया और फिर उसे स्ट्रेचर पर लेकर तीन किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया गया, जहां से उसे एम्बुलेंस में कपकोट अस्पताल भेजा गया।
ये पूरी घटना एक मिसाल है – न सिर्फ बहादुरी की, बल्कि इंसानियत और कर्तव्यनिष्ठा की। अगर समय रहते पुलिस टीम ना पहुंचती, तो शायद जितेन्द्र की जान बचा पाना नामुमकिन होता।
बागेश्वर पुलिस की इस कार्यवाही ने ये साबित कर दिया कि चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर नीयत और हिम्मत मजबूत हो, तो हर जान को बचाया जा सकता है। इस जांबाज़ टीम को हमारा सलाम।
बागेश्वर पुलिस की ये बहादुरी भुलाना आसान नहीं। ऐसे ही और सच्ची और ज़मीनी खबरों के लिए जुड़े रहिए मेरा हक न्यूज़ के साथ।





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