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कौसानी में छोलिया की गूंज से सजेगा सांस्कृतिक स्वाभिमान, परंपरा और पर्यटन को जोड़ने की नई पहल

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छोलिया की गूंज से सजेगा सांस्कृतिक स्वाभिमान, परंपरा और पर्यटन को जोड़ने की नई पहल

रिपोर्ट भगवत नेगी

मेरा हक न्यूज़ में आपका स्वागत है। कुमाऊँ की समृद्ध लोक परंपरा को सम्मान और पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत पहली बार छोलिया महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन स्थानीय संस्कृति, परंपरा और कलाकारों को केंद्र में रखते हुए पर्यटन की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास है। इस महोत्सव का आयोजन Kausani Hotels & Restaurant Association और Connect Kausani की संयुक्त पहल से किया जा रहा है, जो क्षेत्र में सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने की दिशा में एक नई शुरुआत मानी जा रही है।

 

आयोजकों के अनुसार यह आयोजन किसी दिखावटी मंचन का प्रयास नहीं है, बल्कि छोलिया नृत्य को उसकी मूल और पारंपरिक अवस्था में प्रस्तुत करने का संकल्प है। छोलिया केवल एक लोकनृत्य नहीं, बल्कि कुमाऊँ की ऐतिहासिक स्मृति, साहस, सामूहिक चेतना और सांस्कृतिक आत्मसम्मान का जीवंत प्रतीक है। इसी सोच के साथ महोत्सव में किसी बाहरी सजावट या आधुनिक शैली के प्रयोग से परहेज किया गया है, ताकि कला अपने शुद्ध स्वरूप में दर्शकों के सामने आ सके।

 

आयोजन के दौरान क्षेत्रीय छोलिया कलाकार अपने पारंपरिक दल, लोक वाद्य और पारंपरिक वेशभूषा के साथ प्रस्तुति देंगे। ये वही कलाकार हैं जिनका इस नृत्य से पीढ़ियों पुराना सीधा संबंध रहा है। इस मंच पर उनकी प्रस्तुति उन प्रतिनिधियों, टूर ऑपरेटरों, स्थानीय उद्यमियों और सांस्कृतिक हितधारकों के समक्ष होगी, जो भविष्य में क्षेत्रीय पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े निर्णयों में अहम भूमिका निभाते हैं।

 

KHARA के सचिव गजेन्द्र मेहरा ने कहा कि यह प्रयास स्थानीय कला और कलाकारों को उनकी वास्तविक पहचान दिलाने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने बताया कि जब तक कलाकारों को मंच, अवसर और निरंतर दृश्यता नहीं मिलेगी, तब तक सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखना कठिन है। इसी सोच के साथ यह महोत्सव केवल एक दिन का कार्यक्रम न होकर एक दीर्घकालिक प्रक्रिया की शुरुआत है।

 

Connect Kausani से जुड़े युवा उद्यमी अक्षित ने बताया कि इस प्रस्तुति को किसी दर्शनीय कार्यक्रम की तरह नहीं रखा गया है। उद्देश्य यही है कि बिना किसी छेड़छाड़ और सौंदर्यीकरण के कला को उसके मूल रूप में सामने लाया जाए, ताकि दर्शक उसकी वास्तविक आत्मा को समझ सकें और उससे जुड़ सकें।

 

कार्यक्रम समन्वयक विनय ने कहा कि यह आयोजन केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। यह स्थानीय कलाकारों के लिए आर्थिक अवसरों की संभावना, क्षेत्र की सांस्कृतिक विशिष्टता की स्पष्ट स्थापना और पर्यटन क्षेत्र में कला की पुनर्पहचान की दिशा में एक ठोस कदम है। इससे आने वाले समय में कलाकारों को नियमित मंच मिलने की संभावना भी बनेगी।

 

कार्यक्रम के दौरान हरेन्द्र चिलवाल ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विशिष्टता और उसकी आर्थिक संभावनाओं को जोड़ना ही आने वाले वर्षों में पर्यटन वृद्धि की सबसे मजबूत दिशा होगी। उनका मानना है कि यदि कला जीवित रहती है, तो पर्यटन भी टिकाऊ बनता है और स्थानीय समुदाय को उसका सीधा लाभ मिलता है।

 

इस पहले आयोजन का उद्देश्य स्पष्ट रूप से तीन बिंदुओं पर केंद्रित है। पहला, स्थानीय कलाकारों के लिए प्रत्यक्ष अवसर और आर्थिक आधार तैयार करना। दूसरा, क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को सम्मानजनक और स्पष्ट रूप से स्थापित करना। तीसरा, आगंतुकों और टूर संचालकों के बीच छोलिया नृत्य को बिना किसी विकृति के उसके मूल स्वरूप में पुनः प्रस्तुत करना।

 

आयोजन का पहला सत्र 31 दिसंबर को प्रातः 10 बजे मुख्य बाजार क्षेत्र में और दूसरा सत्र दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर Gandhi Ashram Kausani परिसर में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में स्थानीय उद्यमी, सांस्कृतिक प्रतिनिधि, कला समुदाय और पर्यटन से जुड़े हितधारक उपस्थित रहेंगे।

 

आयोजकों का कहना है कि यह पहला प्रयास केवल शुरुआत है। आने वाले महीनों में इसी तरह के कार्यक्रम, प्रस्तुतियां और सांस्कृतिक गतिविधियां नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी, ताकि स्थानीय कलाकारों की दृश्यता बढ़े, सांस्कृतिक पहचान सशक्त हो और पर्यटन विकास को एक स्थायी आधार मिल सके।

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