पेंटिंग से बदलेगी किस्मत! तनुजा की तूलिका से जन्म ले रही हैं आत्मनिर्भर बेटियां
रिपोर्ट – भगवत नेगी, मेरा हक न्यूज़
ये कहानी है गरुड़ की उस बेटी की… जिसने तूलिका को हथियार बनाया, रंगों को साथी और कला को अपनी राह। और आज… वो सिर्फ अपने लिए नहीं, दर्जनों बेटियों के लिए रौशनी की उम्मीद बन गई है। नाम है तनुजा आर्या… एक साधारण गांव की असाधारण लड़की, जिसकी उंगलियों से बहते रंग आज पूरे उत्तराखंड को प्रेरणा दे रहे हैं।
oplus_0
गढ़सेर गांव की रहने वाली तनुजा, न केवल बेहतरीन पेंटिंग बनाती हैं बल्कि अपनी कला से समाज में बदलाव भी ला रही हैं। जल रंग, तेल रंग, पेंसिल शेडिंग से लेकर मंडला आर्ट, सेल्फ पोट्रेट, क्ले आर्ट, नेम प्लेट, वाल पेंटिंग, मधुबनी आर्ट और ऐपण जैसी पारंपरिक लोककलाओं में उन्होंने महारथ हासिल कर ली है। और यही नहीं, तनुजा ऐपण की विलुप्त होती विधाओं जैसे लक्ष्मी चौकी, गणेश चौकी, पूजा थाल, गागर सजावट को फिर से जीवित करने का काम कर रही हैं।
oplus_0
इंटर की पढ़ाई चमोली के तलवाड़ी इंटर कॉलेज से और BFA की पढ़ाई अल्मोड़ा के सोबन सिंह जीना परिसर से पूरी करने के बाद तनुजा ने पेंटिंग को सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि अपना पेशा बना लिया। उन्होंने खुद की आर्ट गैलरी शुरू की है और ऑर्डर के अनुसार लोगों के घरों की दीवारों को रंगीन कहानियों से सजा रही हैं। दिल्ली, देहरादून, अल्मोड़ा, चमोली और हिमाचल तक उन्होंने अपने प्रोजेक्ट्स को पहुंचाया है।
oplus_0
तनुजा का कहना है कि अभी इस क्षेत्र में स्कोप भले ही कम हो, लेकिन अगर बेटियां ठान लें, तो कला भी रोज़गार बन सकती है। यही वजह है कि आज दो दर्जन से ज्यादा बालिकाएं तनुजा से प्रेरणा लेकर इस कला को सीख रही हैं। वो उन्हें मुफ्त में सिखाती हैं, उनका मार्गदर्शन करती हैं और बताती हैं कि कैसे ये हुनर उन्हें आत्मनिर्भर बना सकता है।
तनुजा का उद्देश्य सिर्फ खुद को स्थापित करना नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की लोककलाओं को देश-दुनिया तक पहुंचाना है। उनका ऐपण आर्ट अब बाजार में हाथों-हाथ बिक रहा है और Instagram पर ‘Aipan & Creative Art’ नाम से लोग उनके डिजाइनों को फॉलो कर रहे हैं। साथ ही उनका YouTube चैनल ‘Tanuja Art’ भी युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
महज 15 से 20 हजार रुपये महीने कमाकर तनुजा दिखा रही हैं कि अगर कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो तो किसी भी गांव की बेटी अपने हुनर से ना सिर्फ अपना भविष्य संवार सकती है, बल्कि औरों के लिए भी रास्ता बना सकती है।
गरुड़ की यह बेटी आज एक मिशन पर है — ऐपण और पेंटिंग को उत्तराखंड में नया जीवन देना। और हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम ऐसी बेटियों को प्रोत्साहित करें, उन्हें पहचान दें और उनके सफर का हिस्सा बनें। क्योंकि जब बेटियां उठती हैं, तो समाज जागता है।
तनुजा की तरह हर गांव से एक प्रेरणा निकले, यही इस खबर का संदेश है।
मेरा हक न्यूज़ के लिए गरुड़ से भगवत नेगी की रिपोर्ट।