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22 दिन की मासूम की चुप्पी ने खड़े किए कई सवाल, परिवार ने लगाई न्याय की गुहार

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22 दिन की मासूम की चुप्पी ने खड़े किए कई सवाल, परिवार ने लगाई न्याय की गुहार

रिपोर्ट भगवत नेगी मेरा हक न्यूज

मेरा हक न्यूज़ में आपका स्वागत है। कभी–कभी जिंदगी की एक छोटी सी घटना पूरे परिवार की दुनिया बदल देती है। एक ऐसी ही दर्दनाक और मार्मिक घटना सामने गरुड़ ब्लॉक के जैसर गांव से आई है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। मात्र 22 दिन की नवजात बच्ची की अचानक हुई मृत्यु ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है और अब इस मामले में गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

बच्ची के दादा केसर सिंह कोरंगा  के अनुसार 9 फरवरी 2026 को जब परिवार के सदस्य अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। शाम लगभग साढ़े छह बजे जब बच्ची के दादा घर लौटे तो घर का माहौल सामान्य दिखाई दिया। बताया गया कि बहू अपनी बच्ची को लेकर उनके पास आई। जैसे ही उन्होंने बच्ची को गोद में लिया, उन्हें बच्ची के शरीर में कोई हरकत महसूस नहीं हुई। यह देख परिवार के सभी लोग घबरा गए और तुरंत बच्ची को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

 

अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा परीक्षण के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया गया। यह सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर में जहां कुछ दिन पहले नई किलकारी गूंजी थी, वहीं अब सन्नाटा पसरा हुआ था। परिवार के अनुसार बच्ची के गले पर निशान दिखाई देने की बात भी सामने आई, जिसके बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया।

 

परिजनों ने इस घटना पर आशंका जताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है। परिवार का कहना है कि पति–पत्नी के बीच पूर्व से ही पारिवारिक विवाद और मनमुटाव की स्थिति बनी रहती थी। इसी संदर्भ में उन्होंने अपनी बहू पर नवजात बच्ची की मृत्यु को लेकर संदेह व्यक्त किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बच्ची के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है, ताकि वास्तविक कारण स्पष्ट हो सके।

 

परिवार का यह भी कहना है कि घटना के बाद वे अत्यधिक सदमे में थे, जिसके कारण शिकायत दर्ज कराने में कुछ विलंब हो गया। लेकिन अब उन्होंने औपचारिक रूप से प्राथमिकी दर्ज कराते हुए निष्पक्ष जांच और उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और जांच अधिकारी को नामित कर दिया गया है।

 

यह घटना केवल एक परिवार की निजी त्रासदी नहीं है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है। पारिवारिक विवाद, मानसिक तनाव और संवाद की कमी कभी–कभी ऐसे दुखद परिणाम सामने ला सकती है, जिसकी भरपाई जीवन भर संभव नहीं होती। एक मासूम जिंदगी, जिसने अभी दुनिया को ठीक से देखा भी नहीं था, वह अचानक थम गई। यह सोचकर ही मन व्यथित हो उठता है।

 

अब सभी की निगाहें जांच पर टिकी हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है और चाहता है कि सच्चाई सामने आए, ताकि मासूम बच्ची की आत्मा को शांति मिल सके।

 

मेरा हक न्यूज़ इस संवेदनशील मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच प्रक्रिया का सम्मान करता है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, हर पक्ष को निष्पक्ष रूप से देखा जाना आवश्यक है। लेकिन यह घटना हमें यह जरूर सिखाती है कि पारिवारिक संवाद, समझदारी और मानसिक संतुलन कितने महत्वपूर्ण हैं।

 

एक 22 दिन की नवजात की खामोश विदाई ने कई अनुत्तरित सवाल छोड़ दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और कानून किस दिशा में कदम बढ़ाता है। हम इस मामले से जुड़े हर अपडेट आप तक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ पहुंचाते रहेंगे।

 

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