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“गांव की बेटी ने दुनिया में बजाया डंका: वर्ल्ड पुलिस गेम्स में भारत को दिलाए 4 मेडल!

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रिपोर्ट,  भगवत नेगी मेरा हक न्यूज गरुड़

मेरा हक न्यूज़ में आपका स्वागत है। आज की ये कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि एक उम्मीद की, एक जुनून की, और एक ऐसे हौसले की है जिसने पहाड़ों से निकलकर अमेरिका तक देश का नाम रोशन किया।

उत्तराखंड के एक छोटे से गांव पिंगलो की बेटी ममता खाती जो अल्मोड़ा पुलिस विभाग में कार्यरत है , ने वो कर दिखाया है, जो लाखों लोग सिर्फ सपना ही देख पाते हैं। अमेरिका के बर्मिंघम शहर में आयोजित वर्ल्ड पुलिस गेम्स में ममता खाती ने भारत के लिए चार-चार मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।

 

क्रॉस कंट्री 10 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण दौड़ में उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया, जबकि 5 किलोमीटर की रेस में उन्होंने सिल्वर मेडल हासिल किया। उनकी मेहनत, समर्पण और अनुशासन ने उन्हें न केवल व्यक्तिगत रूप से सफल बनाया, बल्कि उन्होंने देश का झंडा भी गर्व से ऊँचा कर दिया।

 

ममता खाती, रणजीत सिंह खाती और हंसी देवी की बेटी हैं, जिनका परिवार उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के गरुड़ ब्लॉक, पिंगलो गांव में रहती है। ये वही गांव है जहाँ संसाधनों की कमी है, लेकिन सपनों की कोई सीमा नहीं। ममता की इस उपलब्धि ने ये साबित कर दिया कि अगर लगन सच्ची हो, तो कोई भी दूरी, कोई भी मंज़िल बड़ी नहीं होती।

 

एक साधारण ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी ममता ने अपनी मेहनत से खास मुकाम हासिल किया। आज उनके गांव में जश्न का माहौल है, और पूरे उत्तराखंड को उन पर गर्व है। ममता न सिर्फ एक एथलीट हैं, बल्कि लाखों युवाओं की प्रेरणा बन चुकी हैं—खासकर उन बेटियों के लिए, जो सोचती हैं कि छोटे गांवों से निकलकर बड़ी सफलता पाना मुश्किल है।

 

उनकी ये जीत सिर्फ पदकों की नहीं, बल्कि उन चुनौतियों पर विजय की है, जो एक पहाड़ी बेटी को रोज झेलनी पड़ती हैं—कभी संसाधनों की कमी, कभी सामाजिक दबाव, और कभी शारीरिक थकान। लेकिन ममता ने कभी हार नहीं मानी। वो दौड़ती रहीं, सपनों के पीछे, मंज़िल की तरफ… और आज उनके पदक सिर्फ धातु के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि एक पूरे समाज के लिए उम्मीद की किरण हैं।

 

ममता की कहानी हमें ये सिखाती है कि सफलता के लिए बड़े शहर या महंगे कोचिंग सेंटर ज़रूरी नहीं होते। ज़रूरी होती है तो सिर्फ एक आग—अंदर से जलती हुई। ममता खाती की मेहनत, अनुशासन और लगन ने दुनिया को दिखा दिया कि गांव की बेटियां भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमक सकती हैं।

 

ममता को मेरा हक न्यूज़ की ओर से ढेरों शुभकामनाएं और सम्मान। देश को आप पर गर्व है, और यकीन मानिए, आपने सिर्फ दौड़ नहीं जीती… आपने पूरे भारत का दिल जीत लिया।

 

अगर आप भी इस खबर से प्रेरित हुए हैं तो इसे जरूर शेयर करें, ताकि ममता जैसी और बेटियों को मिले वो हौसला, जिसकी उन्हें सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।

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