होटल की नौकरी छोड़ी, गांव लौटकर ट्राउट पालन अपनाया; आज 60 हजार तक की कमाई, दूसरों को भी रोजगार
Report- Vaishnavi
बागेश्वर। कभी रोजगार की तलाश में युवाओं को गांव छोड़कर शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब जिले में स्वरोजगार के नए अवसर ग्रामीणों को वापस गांव से जोड़ रहे हैं। ट्राउट मत्स्य पालन बागेश्वर में युवाओं के लिए रोजगार और बेहतर आय का मजबूत माध्यम बनकर उभर रहा है। विभागीय योजनाओं, तकनीकी सहयोग और स्थानीय जल संसाधनों के उपयोग से मत्स्य पालक अपनी आजीविका मजबूत करने के साथ अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं।
विकासखंड बागेश्वर के ग्राम सानिउडियार निवासी चन्द्रशेखर इसकी मिसाल हैं। वर्ष 2016 में होटल मैनेजमेंट का कोर्स करने के बाद उन्होंने दिल्ली के एक होटल में कुक की नौकरी की। वर्ष 2019 में नौकरी छोड़कर गांव लौटे और ट्राउट मत्स्य पालन को स्वरोजगार बनाया। वर्ष 2021-22 में विभाग से मोबाइल फिश वैन मिलने के बाद उन्होंने ट्राउट से तैयार व्यंजनों की बिक्री शुरू की। वर्तमान में उन्हें इससे हर महीने करीब 55 से 60 हजार रुपये की आय हो रही है और दो अन्य लोगों को रोजगार भी मिला है।

कपकोट के ग्राम जगथाना निवासी चन्दन सिंह पिछले 10 वर्षों से ट्राउट उत्पादन कर रहे हैं। वह वर्तमान में सालाना करीब 35 कुंतल ट्राउट का उत्पादन कर रहे हैं और लगभग 30 लोगों को रोजगार से जोड़ चुके हैं। उनके उत्पाद की मांग आईटीबीपी, एसएसबी के अलावा विभिन्न होटल और रेस्टोरेंट में बनी हुई है।
वहीं ग्राम लीती की प्राथमिक मत्स्य जीव सहकारी समिति में 15 सदस्य सक्रिय रूप से मत्स्य पालन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत समिति के लिए 10 रेसवे बनाए गए हैं। समिति ने मार्च 2026 तक करीब 16 कुंतल ट्राउट का उत्पादन कर लगभग 8 लाख रुपये की आय अर्जित की है।

ट्राउट पालन के जरिए बागेश्वर में प्राकृतिक जल संसाधनों को रोजगार और आय के अवसरों में बदला जा रहा है। ग्रामीण युवाओं को गांव में ही बेहतर आजीविका मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। साथ ही यह पहल आत्मनिर्भरता और रिवर्स पलायन की दिशा में भी सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रही है।





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