Home » उत्तराखंड » बागेश्वर न्यूज़ » मां नंदा भगवती लोकजात यात्रा 2025: मायके से ससुराल की आध्यात्मिक परंपरा और देवराडा में छह माह का पूजा प्रवास”

मां नंदा भगवती लोकजात यात्रा 2025: मायके से ससुराल की आध्यात्मिक परंपरा और देवराडा में छह माह का पूजा प्रवास”

Spread the love

रिपोर्ट भगवत नेगी मेरा हक न्यूज

मां नंदा भगवती की लोकजात यात्रा 2025 कुरूड सिद्धपीठ मंदिर से शुरू होकर कृष्ण जन्माष्टमी के दिन विभिन्न पड़ावों के माध्यम से होती है। यह यात्रा वेदनी कुण्ड में नंदा सप्तमी की जात से होकर गुजरती है। इसके बाद मां नंदा अपनी वापसी करती हैं और अनंत चतुर्थदशी के दिन नंदा धाम देवराडा पहुंचती हैं, जहां वह अपने सिद्धपीठ मंदिर में विराजमान होती हैं। इस स्थान देवराडा में मां नंदा का छह महीने तक पूजा-अर्चना और प्रवास होता है। यह यात्रा मां नंदा के मायके से ससुराल (कैलाश) जाने की प्रतीकात्मक धार्मिक परंपरा है, जो श्रद्धालुओं के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव प्रस्तुत करती है।

इस वर्ष 6 सितम्बर 2025 को मां नंदा की लोकजात यात्रा का समापन हुआ और मां की डोली देवराडा मंदिर में छह महीने के लिए विराजमान की गई। श्रद्धालु इस दौरान पूजा-अर्चना करते हैं और मां नंदा को सौगात भेंटकर उनकी यात्रा की कुशलता की कामना करते हैं। देवराडा में मां नंदा के प्रवास के दौरान भव्य पूजा-अर्चना एवं धार्मिक आयोजन होते हैं।

 

इस यात्रा का धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व बहुत बड़ा है और इसे उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में गहरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। मां नंदा को गढ़वाल और कुमाऊं की इष्टदेवी माना जाता है और यह लोकजात यात्रा उनके मायके कुरूड से लेकर नंदा धाम देवराडा तक की एक परंपरा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Mera Hak News हिंदी के साथ रहें अपडेट

सब्स्क्राइब कीजिए हमारा डेली न्यूजलेटर और पाइए खबरें आपके इनबॉक्स में

और खबरें

Our Visitor

0 5 0 1 7 3
Users Today : 1368
Users Yesterday : 424
Users Last 7 days : 2832

Rashifal