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गायब होती कुमाऊनी संस्कृति को बचाने की अनोखी पहल, बच्चों ने सीखे पारंपरिक खेल और भाषा के संस्कार

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गायब होती कुमाऊनी संस्कृति को बचाने की अनोखी पहल, बच्चों ने सीखे पारंपरिक खेल और भाषा के संस्कार

मेरा हक न्यूज़ में आपका स्वागत है। नई शिक्षा नीति के साथ अब स्कूलों में बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि उन्हें अपनी मातृभाषा, संस्कृति और परंपराओं से भी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसी दिशा में अटल उत्कृष्ट पदम सिंह परिहार राजकीय इंटर कॉलेज वज्यूला में आयोजित समर कैम्प 2026-27 का दूसरा दिन बेहद उत्साह और ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। सात दिवसीय यह विशेष समर कैम्प 27 मई से 2 जून तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें लगभग 50 छात्र-छात्राएँ भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना सभा के साथ हुई, जिसके बाद बच्चों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। भारतीय भाषाओं और स्थानीय संस्कृति पर आधारित इस समर कैम्प का संचालन नोडल अधिकारी हेमंत कांडपाल के निर्देशन में किया जा रहा है। दूसरे दिन के कार्यक्रम का संचालन मेघा कोरंगा प्रवक्ता जीव विज्ञान द्वारा किया गया। उन्होंने सबसे पहले बच्चों को योग और व्यायाम कराया, जिससे बच्चों में सकारात्मक ऊर्जा और अनुशासन का संचार हुआ।

इसके बाद विद्यालय के प्रधानाचार्य दीपक आर्या ने बच्चों को हिंदी भाषा और कुमाऊनी बोली के शब्दों एवं वाक्यों के अर्थ के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को बताया कि अपनी मातृभाषा और स्थानीय बोली हमारी पहचान होती है और आने वाली पीढ़ियों तक इसे पहुंचाना बेहद जरूरी है। प्रधानाचार्य दीपक आर्या ने कहा कि इस प्रकार के समर कैम्प बच्चों को अपनी भाषा और संस्कृति को गहराई से समझने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में यदि स्थानीय भाषा और परंपराओं को नहीं बचाया गया तो आने वाले समय में यह धीरे-धीरे विलुप्त हो सकती हैं, इसलिए बच्चों को अभी से अपनी जड़ों से जोड़ना बहुत आवश्यक है।

समर कैम्प के दौरान बच्चों को सिर्फ भाषा ही नहीं बल्कि पारंपरिक कुमाऊनी खेलों से भी परिचित कराया गया। अतिथि शिक्षक सतेन्द्र लाल और रमेश रावत द्वारा बच्चों को अड्डू, पिठ्ठू और रन जैसे पुराने कुमाऊनी खेल खिलवाए गए। इन खेलों में बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और पुराने पारंपरिक खेलों का भरपूर आनंद उठाया। आज के डिजिटल दौर में जहां बच्चे मोबाइल और वीडियो गेम में अधिक समय बिताते हैं, वहीं इस प्रकार के पारंपरिक खेल बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ दिखाई दिया। पारंपरिक गतिविधियों के बाद सभी शिविरार्थियों ने स्वादिष्ट भोजन का भी आनंद लिया। पूरे कार्यक्रम का संचालन मनोज टम्टा द्वारा किया गया। इस अवसर पर चंद्रावती पाण्डेय, हरीश आर्या सहित विद्यालय परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे।

यह समर कैम्प केवल एक सामान्य शैक्षणिक गतिविधि नहीं बल्कि अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की एक प्रेरणादायक पहल बनता दिखाई दे रहा है। विद्यालय द्वारा किया जा रहा यह प्रयास निश्चित रूप से बच्चों के भविष्य और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

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