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पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और संगठन की सबसे बड़ी आवाज़ – सिर्फ बागेश्वर से!

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BHAGWAT NEGI, MERA HAK NEWS, GARUR 9758728705

बागेश्वर की पुण्यभूमि कुली बेगार में एक ऐसा आयोजन हुआ, जिसने पत्रकारिता को नई दिशा, समाज को नई ऊर्जा और उत्तराखंड को एक नया संकल्प दिया। ‘मेरा हक न्यूज़’ के इस विशेष प्रस्तुति में हम आपको लिए चलते हैं उस राज्य स्तरीय संगोष्ठी में, जो सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पत्रकारिता के आत्म-मंथन और सामाजिक सरोकारों के पुनर्संवेदन का उत्सव थी।

यह आयोजन था — नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स उत्तराखंड के बैनर तले आयोजित राज्य स्तरीय संगोष्ठी और यूनियन के पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण समारोह। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे बागेश्वर के जिलाधिकारी आशीष भट्टगई, नगर पालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल पहुचे । उनके सान्निध्य में बागेश्वर में उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से आए पत्रकारों ने न केवल लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की जिम्मेदारियों पर चर्चा की, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली प्रतिभाओं का सम्मान भी किया।

कार्यक्रम की शुरुआत एक दीप प्रज्वलित व सशक्त उद्घाटन वक्तव्य से हुई, जिसमें उत्तराखंड में पत्रकारों की चुनौतियों, जिम्मेदारियों और अवसरों पर खुलकर चर्चा की गई। मुख्य वक्ता के रूप में भुवन पाठक ने इस मंच पर विचार रखे साथ में प्रभारी संगठन अध्यक्ष श्रीमती दया जोशी, धर्मानंद खोलिया, और बागेश्वर के जिला अध्यक्ष श्री शंकर पांडे आदि सभी वक्ताओं ने एक स्वर में यह बात दोहराई कि आज पत्रकारिता को केवल खबरों तक सीमित नहीं रहना, बल्कि समाज की पीड़ा को मंच और समाधान दिलाने का माध्यम बनना होगा।

अब आइए, आपको बताते हैं उस संगठन के बारे में, जो इस पहल का आधार बना — नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स, उत्तराखंड। यह कोई साधारण यूनियन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आत्मा से जुड़ा पत्रकारों का एक सशक्त और पंजीकृत मंच है। 8 अप्रैल 2012 को हरिद्वार में इसका गठन साहित्यकार और वरिष्ठ पत्रकार श्री त्रिलोक चंद्र भट्ट के नेतृत्व में हुआ था। यह यूनियन न केवल प्रेस की स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ती है, बल्कि मीडियाकर्मियों को संगठित कर पत्रकारिता के उच्च आदर्शों की स्थापना में निरंतर सक्रिय है।

इस यूनियन का पंजीकरण 12 नवम्बर 2012 को ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 के अंतर्गत हुआ, और तभी से यह उत्तराखंड के हर जिले — देहरादून, पौड़ी, चमोली, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चम्पावत, बागेश्वर आदि में अपने संगठनात्मक ढांचे के माध्यम से सक्रिय है।

यूनियन की ताकत इसका कार्यक्षेत्र है। इसमें प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के संवाददाता, संपादक, उप-संपादक, फीचर राइटर, कार्टूनिस्ट, छायाकार, कापीराइटर, कवि, लेखक और साहित्यकार तक को एक मंच पर जोड़ा गया है। यह अकेली ऐसी यूनियन है जिसमें केवल पत्रकार नहीं, बल्कि मीडिया से जुड़े सभी रचनात्मक व्यक्ति सदस्य बन सकते हैं।

इस यूनियन का उद्देश्य पत्रकारों के हित में ठोस नीतिगत बदलाव लाना है। यूनियन ने पत्रकारों की सुविधा के लिए प्रेस मान्यता, ग्रुप इंश्योरेंस, पत्रकार सुरक्षा कानून, डीएवीपी जैसी संस्थाओं में उत्तराखंड से प्रतिनिधित्व, ऑनलाईन विज्ञापन व बिलिंग सिस्टम जैसी मांगें उठाई हैं, जिनमें से कई पर कार्य भी हो चुका है।

एक विशेष उपलब्धि के रूप में वर्ष 2015 में यूनियन के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य श्री बालेश बवानिया को भारत सरकार की विज्ञापन समिति में नामित किया गया, जो उत्तराखंड के लिए गर्व की बात रही। इसके बाद श्री निशीथ सकलानी को पत्रकार कल्याण कोष में सदस्यता दी गई और श्री सुरेश पाठक को प्रिंट मीडिया विज्ञापन समिति में स्थान मिला।

यही नहीं, संस्थापक अध्यक्ष त्रिलोक चंद्र भट्ट को भी पत्रकार कल्याण कोष संचालन समिति में 2 वर्षों के लिए सदस्य नामित किया गया, जिनके प्रयासों से राज्य के संकटग्रस्त पत्रकारों और उनके परिवारों को 1.66 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता प्राप्त हुई।

यूनियन केवल पत्रकारों के अधिकारों की बात नहीं करती, बल्कि उनके जीवन की कठिनाइयों को भी समझती है। इसी उद्देश्य से ‘एनयूजे मीडिया वेलफेयर फाउंडेशन ट्रस्ट’ की स्थापना की गई, जो पत्रकारों, लेखकों, साहित्यकारों, कलाकारों और उनके आश्रितों को छात्रवृत्ति, चिकित्सा सहायता, स्वरोजगार योजनाएं और सम्मान प्रदान करता है। ट्रस्ट का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवा देने वालों को नैतिक और सामाजिक संबल भी प्रदान करना है।

साल 2018 में यूनियन ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया — ‘एनयूजे इमरजेंसी रिलीफ फंड’ की स्थापना। इसका उद्देश्य पत्रकारों को आपात स्थिति में तत्काल सहायता पहुंचाना है। चाहे दुर्घटना हो, बीमारी या सामाजिक संकट — यह ट्रस्ट पत्रकारों के लिए संबल बन कर खड़ा है।

कार्यक्रम में विमोचित स्मारिका ‘उत्तर पथ’ ने यूनियन के इतिहास, संघर्षों और उपलब्धियों को विस्तार से प्रस्तुत किया। इस स्मारिका में उत्तराखंड में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, पत्रकारों के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान के प्रयासों को बड़े गहराई से समेटा गया है।

उल्लेखनीय है कि यूनियन राज्य में प्रेस क्लबों के सरकारी फंड के पारदर्शी उपयोग, लघु एवं मझोले समाचार पत्रों को हैरिटेज दर्जा देने, क्षेत्रीय भाषाओं में प्रकाशित समाचार पत्रों को विज्ञापन में प्राथमिकता देने जैसे मुद्दों को भी सरकार के सामने बार-बार उठाती रही है।

यही नहीं, यूनियन के प्रयासों से उत्तराखंड में पत्रकारों को फ्री यात्रा सुविधा, बीमार पत्रकारों को विशेष चिकित्सा सहायता, आपदाग्रस्त क्षेत्रों में पत्रकारों को राहत, और सूचना निदेशालय में पारदर्शिता लाने जैसे अनेक कदम भी उठाए गए हैं।

बागेश्वर में आयोजित इस संगोष्ठी ने एक नई उम्मीद और विश्वास की लहर जगा दी है कि पत्रकारिता न केवल लोकतंत्र की रीढ़ है, बल्कि समाज की आत्मा भी। और इस आत्मा को संवेदनशीलता, निष्ठा और समाज सेवा के संकल्प से ही जीवित रखा जा सकता है।

अंत में यह कहना बिल्कुल उपयुक्त होगा कि नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स केवल पत्रकारों का संगठन नहीं है — यह एक विचार है, एक आंदोलन है, एक मिशन है। यह मिशन है पत्रकारों की आवाज़ को न दबने देने का, मीडिया को सिर्फ व्यवसाय नहीं, सामाजिक सरोकार का साधन बनाने का और पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, एक मिशनरी सेवा भाव में बदलने का।

यूनियन का यही संदेश बागेश्वर की घाटियों में गूंजा — कि जब पत्रकार जागता है, तो समाज सो नहीं सकता। और जब पत्रकार संगठित होता है, तो लोकतंत्र की आवाज़ बुलंद होती है।

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