बागेश्वर जिले में नशा उन्मूलन की दिशा में एक और बड़ा कदम देखने को मिला जब शनिवार को जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने जिला मुख्यालय के समीप संचालित 15-बेड वाले नशा मुक्ति केंद्र का औचक निरीक्षण किया। यह निरीक्षण सिर्फ एक व्यवस्था की जांच नहीं, बल्कि मानवता और सेवा भाव का भी उदाहरण बन गया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी सीधे उन लोगों से मिले जो इस केंद्र में इलाज करा रहे हैं। उन्होंने न सिर्फ उनकी ज़रूरतें जानीं, बल्कि बेहद सहानुभूति के साथ उनकी भावनाओं को भी समझा। उनका यही व्यवहार इस बात का संकेत था कि प्रशासन अब सिर्फ सुविधा देने तक सीमित नहीं, बल्कि बदलाव की प्रक्रिया में संवेदनशील भागीदार बनना चाहता है।
जिलाधिकारी ने केंद्र में उपलब्ध तमाम व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया — चाहे वो स्वच्छता हो, भोजन की गुणवत्ता हो, या चिकित्सा और परामर्श सेवाएं। उन्होंने रसोईघर में जाकर खुद खाना बनाने की जगह देखी और जरूरी सुधारों के निर्देश भी दिए ताकि केंद्र में रह रहे लोगों को गरिमापूर्ण वातावरण मिल सके।
इस दौरान उन्होंने केंद्र स्टाफ से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि कर्मचारियों का नियमित प्रशिक्षण बेहद ज़रूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे केंद्र केवल इलाज का स्थान नहीं हैं, बल्कि यह वह जगह हैं जहां इंसानों को एक नई जिंदगी दी जाती है। इसलिए केंद्र में सेवा की गुणवत्ता और मानवीय संवेदनाओं दोनों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने ये भी कहा कि नशा मुक्ति केवल दवाओं से नहीं, बल्कि मानसिक समर्थन और सामाजिक पुनर्स्थापन से संभव है। इसीलिए, पुनर्वास की प्रक्रिया को गंभीरता से लेना होगा, जिससे इलाज के बाद व्यक्ति समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सके।
निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे और उन्होंने केंद्र में चल रही सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी।
मेरा हक न्यूज़ की तरफ से हम प्रशासन के इस सराहनीय कदम की सराहना करते हैं और उम्मीद करते हैं कि भविष्य में भी नशा मुक्त समाज की दिशा में ऐसे प्रयास जारी रहेंगे।
आप देखते रहिए — मेरा हक न्यूज़।





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