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 हिंदी दिवस पर विशेष व्याख्यान, स्वर्गीय मंजू जोशी की स्मृति में हिंदी भाषा की शक्ति और गौरव पर चर्चा

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रिपोर्ट भगवत नेगी, मेरा हक न्यूज़

 

हिंदी दिवस के खास मौके पर आज गरुड़ के सेंट एडम्स पब्लिक स्कूल में एक बेहद प्रेरणादायक और भावनात्मक कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम स्वर्गीय मंजू जोशी की स्मृति में हुआ, जिनका जीवन हिंदी भाषा और शिक्षा को समर्पित रहा। विषय था – वैश्विक परिदृश्य में हिंदी भाषा। यह अवसर केवल एक व्याख्यान का नहीं बल्कि हिंदी भाषा की आत्मा को महसूस करने और उसकी शक्ति को पहचानने का था।

 

कार्यक्रम की शुरुआत प्रबंधक जावेद सिद्दीकी ने की, जिन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया। इसके बाद हरीश जोशी ने हिंदी दिवस पर अपने विचार रखते हुए उन विद्यार्थियों का सम्मान किया जो हिंदी भाषा पर विशेष कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा पर और गहराई से काम किया जा सकता है और नई पीढ़ी इसमें बड़ा योगदान दे सकती है।

 

विद्यालय में हिंदी भाषा में सर्वोत्तम कार्य करने वाले विद्यार्थियों को विशेष रूप से सम्मानित भी किया गया। सम्मान पाने वालों में रुद्राक्ष बिष्ट, नितिन भंडारी और स्मृति फर्स्वाण शामिल रहे। यह क्षण बच्चों के लिए गर्व और प्रोत्साहन का था।

 

सेंट एडम्स पब्लिक स्कूल की शिक्षिका प्रीति पुरोहित ने हिंदी भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वर्गीय मंजू जोशी के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि मंजू जोशी ने अपने जीवनकाल में हिंदी भाषा को न सिर्फ विद्यालय बल्कि समाज में भी मजबूती से स्थापित करने का प्रयास किया और आज की पीढ़ी के लिए वे एक प्रेरणा बनी हुई हैं।

 

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी ने हिंदी के वैश्विक स्वरूप पर बेहद सारगर्भित विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज हमें भाषण की नहीं, बल्कि संवाद की आवश्यकता है। हिंदी भाषा वैश्विक स्तर पर लगातार आगे बढ़ रही है और संचार का सबसे सशक्त माध्यम बन रही है। भारत में 57 प्रतिशत लोग हिंदी बोलते हैं, जबकि अंग्रेजी बोलने वालों की संख्या केवल 6 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि कोई भी भाषा कभी मृत नहीं होती, केवल शब्द खो जाते हैं। गुलामी के दौर में हिंदी को उसका उचित स्थान नहीं मिल सका, लेकिन इसकी शक्ति इतनी बड़ी थी कि इसने स्वतंत्रता संग्राम के राष्ट्रीय आंदोलन को एकता प्रदान की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हमें किसी भी भाषा के प्रति दुराग्रह नहीं रखना चाहिए, बल्कि सभी भाषाओं को समान सम्मान देना चाहिए।

 

कार्यक्रम में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनमें जावेद सिद्दीकी, सुरेंद्र वर्मा सुंदर, हरीश चंद्र जोशी, प्रेमा भट्ट, मोहन चंद्र जोशी, मुर्सिल सिद्दीकी, उमा बिष्ट और गीता भंडारी शामिल थे। इन सभी की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया।

 

आज का यह आयोजन केवल हिंदी दिवस का उत्सव नहीं था, बल्कि यह इस बात का संदेश भी था कि हिंदी भाषा हमारी पहचान है, हमारी एकता का प्रतीक है और हमारी संस्कृति की आत्मा है। स्वर्गीय मंजू जोशी की स्मृति में हुआ यह कार्यक्रम आने वाली पीढ़ियों को हिंदी के प्रति और अधिक संवेदनशील और समर्पित होने की प्रेरणा देता रहेगा।

 

 

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