जखेड़ा की मसाला यूनिट ने बदली गांव की तस्वीर, पहले साल 3.95 लाख का कारोबार और 2.58 लाख का लाभ
Report- Vaishnavi
बागेश्वर। स्थानीय संसाधनों को रोजगार और आय के अवसरों में बदलने की दिशा में जखेड़ा क्षेत्र की लाहुरघाटी आजीविका स्वायत्त सहकारिता, तिलसारी के माध्यम से संचालित मसाला यूनिट ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही है। आत्मनिर्भर उत्तराखंड के विजन के अनुरूप संचालित यह पहल स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने के साथ ग्रामीणों के लिए स्वरोजगार के अवसर भी विकसित कर रही है।
वर्ष 2025-26 में स्थापित इस यूनिट में धनिया, जीरा, हल्दी और मिर्च सहित स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल से मसाले तैयार किए जा रहे हैं। यूनिट में लगी मशीन की क्षमता करीब 30 किलोग्राम प्रति घंटा है। परियोजना के लिए कुल 10 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई, जिसमें परियोजना सहयोग, बैंक ऋण और स्वयं की अंशपूंजी शामिल है।

यूनिट ने स्थापना के पहले ही वर्ष में 3,95,500 रुपये का वार्षिक टर्नओवर दर्ज किया, जबकि 2,58,516 रुपये का लाभ अर्जित किया। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही मसालों के प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन के जरिए स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध हो रहा है।
ग्रामीण उद्यम वेगवृद्धि परियोजना (REAP) के माध्यम से स्थानीय संसाधनों, कौशल और उपलब्ध संभावनाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। जखेड़ा की यह मसाला यूनिट इसी प्रयास का उदाहरण है, जो ग्रामीण आय बढ़ाने, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।





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