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पंचमी की रात जागरण में गुजंगे जयकारे, महिलाओं की जलकलश यात्रा से भक्ति में डूबा पूरा क्षेत्र

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रिपोर्ट – भगवत नेगी , मेरा हक़ न्यूज़ गरुड़

धरती पर आस्था का अद्भुत संगम आज देवनाई की पावन भूमि पर देखने को मिला। आज पंचमी का दिन है और पंचमी का दिन माँ भगवती की उपासना में विशेष महत्व रखता है। लोकमान्यताओं के अनुसार पंचमी पर माँ भगवती के चरणों में श्रद्धा से की गई पूजा-अर्चना जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती है। इसी आस्था के भाव से आज देवनाई के लोग एकजुट हुए और माँ भगवती के आठों महोत्सव में पंचमी के दिन को भक्ति और उत्साह से मनाया।

सुबह से ही गाँव की गलियों में एक अलग ही रौनक देखने को मिली। महिलाओं ने अपने पारंपरिक परिधान पहने, लाल, पीले, हरे और सफेद रंग की साड़ियों और घाघरों में सजी महिलाएँ जब अपने सिर पर कलश लेकर माँ भगवती के प्रांगण से शिव मंदिर की ओर निकलीं तो पूरा वातावरण मंगल ध्वनियों से गूंज उठा। इन कलशों में गंगा जल और पवित्र जल भरा गया, जिसे लेकर महिलाएँ शिव मंदिर तक गईं और वहाँ विधिवत पूजा-अर्चना की। इस यात्रा को जलकलश यात्रा कहा जाता है और यह इस महोत्सव की परंपरा का अहम हिस्सा है। गाँव की गलियों से होते हुए यह जलकलश यात्रा जब निकली तो हर घर से लोग दर्शन के लिए बाहर आ गए। बच्चों ने फूल बरसाए, बुजुर्गों ने आशीर्वाद दिए और श्रद्धालुओं की भीड़ माँ भगवती के जयकारों से वातावरण को गूँजाती रही।

आज के दिन की सबसे विशेष बात यह रही कि जागरण का आयोजन भी पंचमी की रात को ही हुआ। पंचमी के जागरण को देवी की विशेष कृपा का प्रतीक माना जाता है। जागरण में रातभर माँ के भजनों की मधुर गूंज सुनाई दी। भक्त मंडलियों ने ढोल, नगाड़े, हारमोनियम और झांझ-मंजीरे की धुन पर देवी गीत गाए। हर तरफ से “जय माँ भगवती” की आवाज गूंज रही थी। श्रद्धालु पूरी रात जागरण में शामिल होकर माँ के दिव्य स्वरूप का ध्यान करते रहे। ऐसा लगता था मानो पूरे देवनाई गाँव में एक साथ भक्ति की गंगा बह रही हो।

इस आयोजन में क्षेत्र के बड़े-बड़े लोग भी श्रद्धा भाव से शामिल हुए। ब्लॉक प्रमुख किशन सिंह बोरा ने इस अवसर पर कहा कि पंचमी का दिन हमारे लिए आध्यात्मिक शक्ति और सामूहिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आशीर्वाद लेने और माँ के चरणों में समर्पण भाव से जुड़ने की अपील की। राज्य मंत्री शिव सिंह बिष्ट भी आयोजन में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि माँ भगवती की कृपा से ही क्षेत्र में समृद्धि और शांति बनी रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजनों से हमारी संस्कृति जीवित रहती है और आने वाली पीढ़ियाँ अपनी परंपराओं को समझती हैं।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष शोभा आर्या भी देवनाई पहुँचीं। उन्होंने महिला शक्ति को विशेष रूप से नमन करते हुए कहा कि जिस तरह आज महिलाओं ने जलकलश यात्रा निकाली, यह हमारे समाज की संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की जीवंत मिसाल है। भाजपा मंडल अध्यक्ष सुनील दोसाद ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित किया और कहा कि ऐसे भक्ति आयोजनों से समाज में एकता, भाईचारा और धार्मिक उत्साह बना रहता है।

मंच पर और आयोजन स्थल पर अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। इनमें प्रमुख रूप से मंगल राणा, चोइस नवीन बोरा, जैका चंदन बोरा, भाजपा मंडल अध्यक्ष सुनील दोसाद , गोपाल दत्त कांडपाल और कई अन्य लोग शामिल रहे। हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस पावन दृश्य के साक्षी बने। दूर-दराज के गाँवों से भी लोग पैदल और वाहनों से यहाँ पहुँचे।

आज के दिन का भंडारा भी विशेष रहा। चंदन बोरा ने अपने सौजन्य से भंडारे का आयोजन किया। उन्होंने कहा कि माँ भगवती की कृपा से ही उन्हें इस आयोजन की सेवा का अवसर मिला। पूरे क्षेत्र से आए हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। प्रसाद वितरण का दायित्व भी चंदन बोरा ने निभाया और श्रद्धालुओं को अपने हाथों से प्रसाद बाँटने का सौभाग्य पाया। प्रसाद वितरण के समय पूरा वातावरण “जय माँ भगवती” के उद्घोषों से गूंज रहा था।

देवी डांगर का अवतरण भी इस आयोजन का एक विशेष पहलू रहा। लोकविश्वास है कि इस दिन देवी डांगर स्वयं प्रकट होकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। श्रद्धालु बड़ी संख्या में इस अद्भुत क्षण के साक्षी बने और अपने जीवन की मंगलकामना के लिए प्रार्थना की।

ब्लॉक प्रमुख किशन बोरा ने सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी सामाजिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है।

आज का दिन सचमुच ऐतिहासिक रहा। देवनाई की गलियों में गूंजते जयकारे, माँ के प्रांगण में सजीव आस्था का माहौल और हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि माँ भगवती की भक्ति में आज भी वही शक्ति है, जो लोगों को एक सूत्र में बाँधती है।

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