एक यात्री लेकर उड़ा हेलीकॉप्टर, दो यात्री लेकर लौटा… आखिर घाटा कौन भर रहा है?
Report- Vaishnavi
बागेश्वर/गरुड़। हल्द्वानी से बागेश्वर के गरुड़ क्षेत्र के बीच संचालित हेलीकॉप्टर सेवा यात्रियों की कम संख्या को लेकर चर्चा में है। हालिया यात्रा के दौरान हल्द्वानी से गरुड़ आने वाली उड़ान में महज एक यात्री सवार था, जबकि गरुड़ से हल्द्वानी लौटने वाली उड़ान में दो यात्रियों ने सफर किया। सात सीट क्षमता वाले हेलीकॉप्टर में इतनी कम सवारी के बावजूद सेवा का संचालन जारी है, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इस उड़ान की आर्थिक लागत की भरपाई किस व्यवस्था के तहत की जा रही है।
हल्द्वानी-गरुड़ हेली सेवा का संचालन Heritage Aviation द्वारा किया जा रहा है और यह क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी व्यवस्था UDAN से जुड़ी है। शुरुआत में हल्द्वानी से बागेश्वर के लिए प्रति यात्री किराया 3500 रुपये निर्धारित किया गया था। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क मार्ग से लगने वाले लंबे समय को देखते हुए यह सेवा स्थानीय लोगों, मरीजों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी विकल्प मानी जा रही है।
इस सेवा को लेकर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के Letter of Award में Haldwani Helipad से Bageshwar Helipad और Bageshwar से Haldwani रूट को PRCS के तहत शामिल किया गया है। दस्तावेज में हेलीकॉप्टर की क्षमता सात सीट और इस रूट के लिए VGF (Viability Gap Funding) 4200 रुपये प्रति सीट दर्ज है।

VGF का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रीय हवाई मार्गों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है, जहां सीमित यात्रियों के कारण सेवा का संचालन व्यावसायिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि VGF की दर दर्ज होने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर उड़ान में खाली सीटों का पैसा सीधे ऑपरेटर को दिया जा रहा है। वास्तविक भुगतान किस आधार पर और कितनी राशि का हुआ, इसकी जानकारी संबंधित विभाग से प्राप्त करना जरूरी है।
इसी को लेकर अब कई सवाल सामने हैं—एक या दो यात्रियों वाली उड़ान की वास्तविक लागत कितनी है? यात्रियों के किराये से कितनी आय होती है? VGF या अन्य सरकारी सहायता के तहत ऑपरेटर को कितनी राशि का भुगतान किया गया है? पिछले छह महीनों में इस सेवा पर सरकार की ओर से कुल कितना खर्च हुआ है?
साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि निर्धारित उड़ानों में से कितनी वास्तव में संचालित हुईं, कुल कितने यात्रियों ने यात्रा की और प्रति उड़ान औसतन कितने यात्री रहे।

गरुड़-हल्द्वानी हेली सेवा पहाड़ में बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। लेकिन कम यात्री संख्या के बीच इसके संचालन की आर्थिक व्यवस्था और सरकारी सहायता से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होने से इस योजना की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी और लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि सेवा किस वित्तीय मॉडल पर संचालित हो रही है।
Mera Hak News का सवाल सेवा बंद करने को लेकर नहीं, बल्कि इस सेवा में होने वाले सरकारी खर्च, VGF भुगतान और यात्रियों की संख्या से जुड़े आंकड़ों में पारदर्शिता को लेकर है। संबंधित विभाग से इन आंकड़ों की जानकारी सामने आने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि गरुड़ की हेली सेवा को संचालित रखने में सरकारी सहयोग की कितनी भूमिका है और इसका लाभ कितने यात्रियों तक पहुंच रहा है।





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