रिपोर्ट – दिनेश नेगी , मेरा हक़ न्यूज़ गरुड़
पहाड़ की मिट्टी में जब महिलाओं की आवाज़ गूंजती है, तो वो सिर्फ एक मांग नहीं होती — वो जीवन की पुकार होती है। गरुड़ के पाये गांव की महिलाओं ने जब देखा कि खेतों में धान की पौध मुरझा रही है, सूख रही है, और आषाढ़ का महीना भी बीतने को है… तो उन्होंने चुप बैठने की बजाय, खुद सिंचाई विभाग का दरवाज़ा खटखटाया।
सुबह दस बजे से ही दर्जनों महिलाएं गरुड़ स्थित सिंचाई विभाग के ऑफिस में धरने पर बैठ गईं। उनके चेहरे पर चिंता थी, पर इरादों में मजबूती थी। उन्होंने साफ कहा – रोपाई तो दूर, हमारी धान की पौध भी अब सूखने लगी है। खेत बंजर हो जाएंगे, और अगर खेत सूखे रह गए तो हम कैसे जिएंगे? राशन नहीं मिलेगा, बच्चों को क्या खिलाएंगे?

इन महिलाओं में शामिल थीं — प्रेमा देवी, आशा देवी, सुनीता नेगी, पूजा बिष्ट, माया, प्रेमा नेगी, रेखा देवी, कमला देवी, पुष्पा देवी, भागीरथी देवी और पूजा नेगी। दो घंटे तक वे डटी रहीं। उन्होंने सिस्टम को चुनौती नहीं दी, बल्कि सिस्टम को चेताया — कि अब भी समय है, कुछ किया जाए।
मौके पर पहुंचे भाजपा जिला महामंत्री घनश्याम जोशी ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उप जिलाधिकारी गरुड़ प्रियंका रानी और सिंचाई विभाग के अधिकारियों से बात की। उन्होंने तुरंत फोन पर संपर्क कर हालात की जानकारी दी। एसडीएम प्रियंका रानी ने भरोसा दिलाया कि सिंचाई विभाग और लघु डाल के अधिकारी शाम पांच बजे पाये गांव पहुंचकर स्वयं महिलाओं की समस्याएं सुनेंगे और समाधान करेंगे।
अब सवाल सिर्फ इतना है — क्या वाकई समाधान मिलेगा? क्या ये महिलाएं फिर से अपने खेतों में धान की हरियाली देख पाएंगी? या फिर ये सिर्फ एक और आश्वासन बनकर रह जाएगा?
पाये गांव की ये महिलाएं आज पहाड़ की हर उस महिला की आवाज़ बन गई हैं, जो खेत से घर तक की लड़ाई अकेले लड़ती है। ये सिर्फ पानी की मांग नहीं थी — ये जीवन के हक़ की आवाज़ थी।
इस खबर पर आपकी क्या राय है? क्या अब प्रशासन को और तेज़ी से काम नहीं करना चाहिए? कमेंट में जरूर बताएं। आप देख रहे हैं — मेरा हक न्यूज़।





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